Swarg Ki Khoj

अगस्त 01, 2023 0 Comments A+ a-



 पुस्तक परिचय 


स्वर्ग की खोज पुस्तक, एक यात्रा है जो विश्व को एक परिवार बनाने का संकल्प लेकर निकलती है। यद्यपि यह अत्यंत चुनौतीपूर्ण मार्ग है, किन्तु संकल्प की दृढ़ता चुनौतियों से अधिक महत्वपूर्ण होती है। 

स्वर्ग की खोज का इंग्लिश एडिशन Discovery of Heaven के नाम से प्रकाशित है। यह परम्परागत पुस्तकों से हटकर एक नयी राह बनाती है। इसे मानव सभ्यता की जीवन शैली का ग्रंथ भी कहा जा सकता है। इसमें पिछले पाँच लाख वर्षों से वर्तमान समय तक मानव सभ्यता की झलक दिखाई पड़ती है, जो होमोनिड्स मानव से लेकर होमो सेम्पियन्स के ग्रियोनाल्डि मेन तक की खूबी और कमियों का संक्षिप्त विश्लेषण करती है। पूरा विश्व, आतंक, युद्ध, प्रतिद्वंद्विता, अहंकार, हथियारों की होड़, नफ़रत की आग जैसे कई महारोगों से ग्रस्त है। अब तो यह रोग पागलपन की हद तक पहुँच चुका है। इसके साथ ही प्रकृति के तंत्र को तोड़ने का अभिशाप मनुष्य के सर पर मौत बनकर मंडरा रहा है। तृतीय विश्वयुद्ध घात लगाए बैठा है। परमाणु बमों का जखीरा पूरी मनुष्य जाति निगलने को तैयार है। 

ऐसे में यह पुस्तक आशा की किरण बनकर हमारे सामने आती है, जो विश्व को एक नयी राह का विकल्प देती है। वैसे तो अतीत में मनुष्य चार चार बड़े हिमयुगों के संकटों का सामना कर चुका है, किन्तु आने वाले महासंकट उससे कहीं अधिक भयावह दिखाई पड़ते हैं।

क्या विश्व में ऐसा कोई नहीं जो इन महासंकटों से मनुष्य को मुक्त करा सके?  यदि नहीं, तो मनुष्य जाति का अन्त करीब है। यदि हाँ तो, प्रयास आवश्यक है। आने वाले इन महासंकटों से बचने के लिए प्रत्येक मनुष्य का धर्म है, कि वह इस दिशा में चिन्तन कर उपचार ढूँढने का प्रयास करे। क्योंकि आपकी सोच भी विश्व को विनाश से बचाने में महती भूमिका अदा कर सकती है। सावधानी और सुरक्षा ही ऐसे अंजान संकटों के सुरक्षा कवच हो सकते हैं। ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ को मूर्त रूप देने का यही उचित समय है। पुस्तक की खास बात यह है कि, यह संकटों से हमें सावधान तो करती ही है, साथ ही उनसे बचने के उपाय भी सुझाती है। यह पृथ्वी पर रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति के हितों का प्रतिनिधित्व कर उन्हें जगाने का कार्य करती है। यह पुस्तक वैज्ञानिकों, महाशक्तियों, नेताओं, अतिविशिष्ट गणमान्यों को भविष्य के महासंकटों के प्रति आगाह कर विश्व शांति की दिशा में चिंतन के लिए विवश भी करती है। 

वर्तमान में विश्व के देश प्रतिस्पर्धा, अहंकार व भय के धरातल पर खड़े हैं। वे जिन परिस्थितियों से घिरे हैं, उसमें सद्भाव और शान्ति सम्भवतः प्रतीत नहीं होती। ऐसी परिस्थितियों में भी संयम और समझ के सूत्रों से यह पुस्तक ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ व विश्वशांति का मार्ग प्रशस्त करती है।