Lado! Bahak Na Jana

दिसंबर 01, 2023 0 Comments A+ a-

 

पुस्तक परिचय


किशोरावस्था में राह से भटकने की सम्भावना बढ़ जाती है। प्रलोभन चुम्बक की भाँति उन्हें इतनी शक्ति से अपनी ओर खींचता है कि, माता-पिता की सीख भी कमजोर पड़ जाती है। फिर माता-पिता एक ही सीख को कई-कई बार दोहराते हैं इससे बच्चों पर उसका असर नहीं पड़ता है। लाडो! बहक न जाना, कच्ची उम्र के लड़के/लड़कियों को बचाकर उनके भविष्य का मार्गदर्शन करती है। समाज में फैल रही विकृत मानसिकता को रोकने और यौन अपराधों से बचने के पुस्तक में आसान तरीके सुझाए गए हैं। विशेषकर लड़कों की अपेक्षा लड़कियाँ अधिक असुरक्षित होती हैं अतः पुस्तक में बेटियों को अनजाने संकट से बचाने और अपने भावी जीवन को संवारने का लेखक ने अनूठा प्रयास किया है। पुस्तक को एक एक अध्याय के माध्यम से समझाया गया है। 

जैसे- 1- जवानी दीवानी होती है, 2- बर्बादी का रास्ता, भागकर शादी करना, 3- प्रलोभन से सावधान, 4- झूठे प्यार से बचें 5- चकाचौंध और वासनात्मक वातावरण, 6- सपनों की उम्र। 7- बाज़ार संस्कृति का झूठा प्रेम, 8- सुन्दरता का मायाजाल, 9- कामांधता एक मानसिक रोग 10- माता-पिता स्वर्ग की सीढ़ी, 11-प्रेम की शक्ति का रहस्य आदि ऐसे लगभग सत्ताईस अध्यायों में विस्तार पूर्वक समझाया गया है, जो किशोरों के भ्रम को तोड़कर वास्तविक जीवन का परिचय कराता है। पुस्तक की भाषा-शैली किशोर उम्र के अनुकूल रखी गयी है, जिससे पढ़ने में उनकी रुचि बढ़े, और वे अधिक से अधिक पुस्तक का लाभ ले सकें। झूठे प्रेमजाल और दुष्कर्म से बचने के पुस्तक में कई ठोस उपाय सुझाये गए हैं। किशोर/युवा बेटियों को भ्रम जाल से सचेत कर, यह पुस्तक उनकी मानसिक चेतना को ऊँचे से ऊँचा उठाने का प्रयास करती है। उन्हें आत्मविश्वास पूर्वक जीने की सुरक्षित राह प्रदान करती है। लाडो! बहक न जाना... कच्ची उम्र की लड़कियों के लिए उनकी सच्ची सहेली और मार्गदर्शक है। यह पुस्तक नकारात्मक विचारों के प्रकोप से बचाती है और सकारात्मक विचारों का निर्माण कर जीवन को रूपान्तरित करती है।